अति प्रसन्न रघुनाथहि जानी
अति प्रसन्न रघुनाथहि जानी
चौपाई १, दोहा ४३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
अति प्रसन्न रघुनाथहि जानी। पुनि नारद बोले मृदु बानी॥ राम जबहिं प्रेरेउ निज माया। मोहेहु मोहि सुनहु रघुराया॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरघुनाथजी को अत्यन्त प्रसन्न जानकर नारदजी फिर कोमल वाणी बोले-हे रामजी! हे रघुनाथजी ! सुनिये, जब आपने अपनी माया को प्रेरित करके मुझे मोहित किया था,।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।
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नारद-राम संवाद