चितवत पंथ रहेउँ दिन राती
चितवत पंथ रहेउँ दिन राती
चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
चितवत पंथ रहेउँ दिन राती। अब प्रभु देखि जुड़ानी छाती॥ नाथ सकल साधन मैं हीना। कीन्ही कृपा जानि जन दीना॥ २ ॥
अर्थ
तबसे मैं दिन-रात आपकी राह देखता रहा हूँ। अब (आज) प्रभु को देखकर मेरी छाती शीतल हो गयी। हे नाथ! मैं सब साधनों से हीन हूँ। आपने अपना दीन सेवक जानकर मुझ पर कृपा की है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “विराध वध और शरभंग प्रसंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा विराध वध और शरभंग मुनि को दर्शन देकर परम गति प्रदान करने का वर्णन है।
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विराध वध और शरभंग प्रसंग