बिरति बिबेक बिनय बिग्याना

चौपाई ३, दोहा ४६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

बिरति बिबेक बिनय बिग्याना। बोध जथारथ बेद पुराना॥ दंभ मान मद करहिं न काऊ। भूलि न देहिं कुमारग पाऊ॥ ३ ॥

अर्थ

तथा वैराग्य, विवेक, विनय, विज्ञान (परमात्मा के तत्त्व का ज्ञान) और वेद-पुराण का यथार्थ ज्ञान रहता है। वे दम्भ, अभिमान और मद कभी नहीं करते और भूलकर भी कुमार्ग पर पैर नहीं रखते।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “संतों के लक्षण और सत्संग प्रेरणा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में संतों के स्वभाव, विनय, दया और सत्संग-भजन की महिमा का वर्णन है।

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संतों के लक्षण और सत्संग प्रेरणा