बिरहवंत भगवंतहि देखी
बिरहवंत भगवंतहि देखी
चौपाई ३, दोहा ४१ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
बिरहवंत भगवंतहि देखी। नारद मन भा सोच बिसेषी॥ मोर साप करि अंगीकारा। सहत राम नाना दुख भारा॥ ३ ॥
अर्थ
भगवान् को विरहयुक्त देखकर नारदजी के मन में विशेष रूप से सोच हुआ। [उन्होंने विचार किया कि] मेरे ही शाप को स्वीकार करके श्रीरामजी नाना प्रकार के दुःखों का भार सह रहे हैं (दुःख उठा रहे हैं)।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।
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नारद-राम संवाद