ऐसे प्रभुहि बिलोकउँ जाई
ऐसे प्रभुहि बिलोकउँ जाई
चौपाई ४, दोहा ४१ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
ऐसे प्रभुहि बिलोकउँ जाई। पुनि न बनिहि अस अवसरु आई॥ यह बिचारि नारद कर बीना। गए जहाँ प्रभु सुख आसीना॥ ४ ॥
अर्थ
ऐसे (भक्तवत्सल) प्रभु को जाकर देखूँ। फिर ऐसा अवसर न बन आवेगा। यह विचार कर नारदजी हाथ में वीणा लिये हुए वहाँ गये, जहाँ प्रभु सुखपूर्वक बैठे हुए थे।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।
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नारद-राम संवाद