बिपति मोरि को प्रभुहि सुनावा

चौपाई ३, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

बिपति मोरि को प्रभुहि सुनावा। पुरोडास चह रासभ खावा॥ सीता कै बिलाप सुनि भारी। भए चराचर जीव दुखारी॥ ३ ॥

अर्थ

प्रभु को मेरी यह विपत्ति कौन सुनावे? यज्ञ के अन्न को गदहा खाना चाहता है। सीताजी का भारी विलाप सुनकर जड़-चेतन सभी जीव दुखी हो गये।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा सीताजी का छलपूर्वक हरण और उनका करुण विलाप का वर्णन है।

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श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप