गीधराज सुनि आरत बानी
गीधराज सुनि आरत बानी
चौपाई ४, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
गीधराज सुनि आरत बानी। रघुकुलतिलक नारि पहिचानी॥ अधम निसाचर लीन्हें जाई। जिमि मलेछ बस कपिला गाई॥ ४ ॥
अर्थ
गीधराज जटायु ने सीताजी की दुःखभरी वाणी सुनकर पहचान लिया कि ये रघुकुलतिलक श्रीरामचन्द्रजी की पत्नी हैं। [उसने देखा कि] नीच राक्षस इनको [बुरी तरह] लिये जा रहा है, जैसे कपिला गाय म्लेच्छ के वश में हो गयी हो।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।
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जटायु-रावण युद्ध