खग कंक काक सृगाल

छन्द ७, दोहा २० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

छन्द पाठ

खग कंक काक सृगाल। कटकटहिं कठिन कराल॥ ७ ॥

अर्थ

चील [या क्रौंच], कौए आदि पक्षी और सियार कठोर और भयावह कट-कट शब्द कर रहे हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का छन्द ७, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध