बार बार प्रभु पद सिरु नाई

चौपाई ७, दोहा ३६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

बार बार प्रभु पद सिरु नाई। प्रेम सहित सब कथा सुनाई॥ ७ ॥

अर्थ

बार-बार प्रभु के चरणों में सिर नवाकर, प्रेम सहित उसने सब कथा सुनायी।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति