पंपा सरहि जाहु रघुराई

चौपाई ६, दोहा ३६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

पंपा सरहि जाहु रघुराई। तहँ होइहि सुग्रीव मिताई॥ सो सब कहिहि देव रघुबीरा। जानतहूँ पूछहु मतिधीरा॥ ६ ॥

अर्थ

पंपा नामक सरोवर को जाइये, हे रघुनाथजी! वहाँ आपकी सुग्रीव से मित्रता होगी। हे देव! हे रघुवीर! वह सब हाल बतायेगा। हे धीरबुद्धि! आप सब जानते हुए भी मुझसे पूछते हैं !

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति