अवध नृपति दसरथ के जाए
अवध नृपति दसरथ के जाए
चौपाई २, दोहा २२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
अवध नृपति दसरथ के जाए। पुरुष सिंघ बन खेलन आए॥ समुझि परी मोहि उन्ह कै करनी। रहित निसाचर करिहहिं धरनी॥ २ ॥
अर्थ
[वह बोली--] अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र, जो पुरुषों में सिंह के समान हैं, वन में खेलने आये हैं। मुझे उनकी करनी ऐसी समझ पड़ी है कि वे पृथ्वी को राक्षसों से रहित कर देंगे।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा द्वारा रावण में दुराशा जगाना, सीता का अग्नि प्रवेश और माया सीता का प्राकट्य का वर्णन है।
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शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता