जिन्ह कर भुजबल पाइ दसानन
जिन्ह कर भुजबल पाइ दसानन
चौपाई ३, दोहा २२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
जिन्ह कर भुजबल पाइ दसानन। अभय भए बिचरत मुनि कानन॥ देखत बालक काल समाना। परम धीर धन्वी गुन नाना॥ ३ ॥
अर्थ
जिनकी भुजाओं का बल पाकर हे दशानन! मुनि लोग वन में निर्भय होकर विचरने लगे हैं। वे देखने में तो बालक हैं, पर काल के समान हैं। वे परम धीर, धनुर्धर और अनेक गुणों से युक्त हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा द्वारा रावण में दुराशा जगाना, सीता का अग्नि प्रवेश और माया सीता का प्राकट्य का वर्णन है।
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शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता