सुनत सभासद उठे अकुलाई

चौपाई १, दोहा २२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत सभासद उठे अकुलाई। समुझाई गहि बाँह उठाई॥ कह लंकेस कहसि निज बाता। केइँ तव नासा कान निपाता॥ १ ॥

अर्थ

शूर्पणखाके वचन सुनते ही सभासद् अकुला उठे। उन्होंने शूर्पणखाकी बाँह पकड़कर उसे उठाया और समझाया। लंकेश ने कहा--अपनी बात तो बता, किसने तेरी नाक-कान काट लिये?

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा द्वारा रावण में दुराशा जगाना, सीता का अग्नि प्रवेश और माया सीता का प्राकट्य का वर्णन है।

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शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता