अरुण नयन राजीव सुवेशं
अरुण नयन राजीव सुवेशं
चौपाई ४, दोहा ११ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
अरुण नयन राजीव सुवेशं। सीता नयन चकोर निशेशं॥ हर हृदि मानस बाल मरालं। नौमि राम उर बाहु विशालं॥ ४ ॥
अर्थ
हे लाल कमल के समान नेत्र और सुन्दर वेषवाले! सीताजी के नेत्ररूपी चकोर के चन्द्रमा, शिवजी के हृदय रूपी मानसरोवर के बालहंस, विशाल हृदय और भुजावाले श्रीरामचन्द्रजी! मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।
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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन