अनुज जानकी सहित प्रभु चाप बान

दोहा ११ · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

अनुज जानकी सहित प्रभु चाप बान धर राम। मम हिय गगन इंदु इव बसहु सदा निहकाम॥ ११ ॥

अर्थ

हे प्रभो! हे श्रीरामजी! छोटे भाई लक्ष्मणजी और सीताजी सहित धनुष-बाणधारी आप निष्काम होकर मेरे हृदय रूपी आकाश में चन्द्रमा की भाँति सदा निवास कीजिये।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का दोहा ११ है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन