एवमस्तु करि रमानिवासा

चौपाई १, दोहा १२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

एवमस्तु करि रमानिवासा। हरषि चले कुंभज रिषि पासा॥ बहुत दिवस गुर दरसनु पाएँ। भए मोहि एहिं आश्रम आएँ॥ १ ॥

अर्थ

“एवमस्तु' (ऐसा ही हो) ऐसा उच्चारण कर लक्ष्मीनिवास श्रीरामचन्द्रजी हर्षित होकर अगस्त्य ऋषि के पास चले। [तब सुतीक्ष्णजी बोले—] गुरु अगस्त्यजी का दर्शन पाए और इस आश्रम में आए हुए मुझे बहुत दिन हो गये।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन