प्रभु जो दीन्ह सो बरु मैं

चौपाई १४, दोहा ११ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रभु जो दीन्ह सो बरु मैं पावा। अब सो देहु मोहि जो भावा॥ १४ ॥

अर्थ

[तब मुनि बोले—] प्रभु ने जो वरदान दिया वह तो मैंने पा लिया। अब मुझे जो अच्छा लगता है वह दीजिये—।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई १४, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन