अंतर प्रेम तासु पहिचाना
अंतर प्रेम तासु पहिचाना
चौपाई ९, दोहा २७ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
अंतर प्रेम तासु पहिचाना। मुनि दुर्लभ गति दीन्हि सुजाना॥ ९ ॥
अर्थ
सुजान (सर्वज्ञ) श्रीरामजी ने उसके हृदय के प्रेम को पहचानकर उसे वह गति (अपना परमपद) दी जो मुनियों को भी दुर्लभ है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “स्वर्ण मृग और मारीच वध” प्रकरण का चौपाई ९, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मारीच का स्वर्ण मृग रूप धारण और श्रीराम द्वारा उसका वध तथा मोक्ष-प्रदान का वर्णन है।
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स्वर्ण मृग और मारीच वध