लछिमन कर प्रथमहिं लै नामा
लछिमन कर प्रथमहिं लै नामा
चौपाई ८, दोहा २७ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
लछिमन कर प्रथमहिं लै नामा। पाछें सुमिरेसि मन महुँ रामा॥ प्रान तजत प्रगटेसि निज देहा। सुमिरेसि रामु समेत सनेहा॥ ८ ॥
अर्थ
पहले लक्ष्मणजी का नाम लेकर उसने पीछे मन में श्रीरामजी का स्मरण किया। प्राण त्याग करते समय उसने अपना (राक्षसी) शरीर प्रकट किया और प्रेमसहित श्रीरामजी का स्मरण किया।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “स्वर्ण मृग और मारीच वध” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मारीच का स्वर्ण मृग रूप धारण और श्रीराम द्वारा उसका वध तथा मोक्ष-प्रदान का वर्णन है।
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स्वर्ण मृग और मारीच वध