आइ गए बगमेल धरहु धरहु धावत

सोरठा १८ · अरण्यकाण्ड

सोरठा पाठ

आइ गए बगमेल धरहु धरहु धावत सुभट। जथा बिलोकि अकेल बाल रबिहि घेरत दनुज॥ १८ ॥

अर्थ

‘पकड़ो-पकड़ो’ पुकारते हुए राक्षस योद्धा बाग छोड़कर धावते हुए आये। जैसे बाल-सूर्य को अकेला देखकर दनुज घेर लेते हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का सोरठा १८ है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।

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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध