प्रभु बिलोकि सर सकहिं न डारी
प्रभु बिलोकि सर सकहिं न डारी
चौपाई १, दोहा १९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु बिलोकि सर सकहिं न डारी। थकित भई रजनीचर धारी॥ सचिव बोलि बोले खर दूषन। यह कोउ नृपबालक नर भूषन॥ १ ॥
अर्थ
[सौन्दर्य-माधुर्यनिधि] प्रभु श्रीरामजी को देखकर राक्षसों की सेना थकित रह गयी। वे उन पर बाण नहीं छोड़ सके। मन्त्री को बुलाकर खर-दूषण ने कहा--यह राजकुमार कोई मनुष्यों का भूषण है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।
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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध