यह सब माया कर परिवारा

चौपाई ४, दोहा ७१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

यह सब माया कर परिवारा। प्रबल अमिति को बरनै पारा॥ सिव चतुरानन जाहि डेराहीं। अपर जीव केहि लेखे माहीं॥ ४ ॥

अर्थ

यह सब माया का परिवारा प्रबल, अमित है। इसका वर्णन कौन कर सकता है? शिवजी और चतुरानन जिससे डरते हैं, तब दूसरे जीव किस लेखे में हैं?

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा