ब्यापि रहेउ संसार महुँ माया कटक
ब्यापि रहेउ संसार महुँ माया कटक
दोहा ७१ (क) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
ब्यापि रहेउ संसार महुँ माया कटक प्रचंड। सेनापति कामादि भट दंभ कपट पाषंड॥ ७१ (क) ॥
अर्थ
माया की प्रचण्ड सेना संसार में व्याप्त रही। सेनापति काम आदि भट दम्भ, कपट और पाषण्ड हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ७१ (क) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा