तारन तरन हरन सब दूषन
तारन तरन हरन सब दूषन
चौपाई ५, दोहा ३५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
तारन तरन हरन सब दूषन। तुलसिदास प्रभु त्रिभुवन भूषन॥ ५ ॥
अर्थ
आप तरन-तारन (स्वयं तरे हुए और दूसरों को तारनेवाले) तथा सब दोषों को हरनेवाले हैं। हे प्रभु, तीनों लोकों के भूषण! तुलसीदास [आपकी स्तुति करते हैं]।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।
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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन