तामस बहुत रजोगुन थोरा
तामस बहुत रजोगुन थोरा
चौपाई ३, दोहा १०४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
तामस बहुत रजोगुन थोरा। कलि प्रभाव बिरोध चहुँ ओरा॥ बुध जुग धर्म जानि मन माहीं। तजि अधर्म रति धर्म कराहीं॥ ३ ॥
अर्थ
तमोगुण बहुत हो, रजोगुण थोड़ा हो, चारों ओर वैर-विरोध हो, यह कलियुग का प्रभाव है। पण्डित लोग युगों के धर्म को मन में जान कर, अधर्म छोड़कर धर्म में प्रीति करते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा