तब मुनीस रघुपति गुन गाथा
तब मुनीस रघुपति गुन गाथा
चौपाई १, दोहा १११ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
तब मुनीस रघुपति गुन गाथा। कहे कछुक सादर खगनाथा॥ ब्रह्मग्यान रत मुनि बिग्यानी। मोहि परम अधिकारी जानी॥ १ ॥
अर्थ
तब हे पक्षिराज! मुनीश्वर ने श्रीरघुनाथजी के गुणों की कुछ कथाएँ आदर सहित कहीं। फिर वे ब्रह्मज्ञान-रत विज्ञानवान् मुनि मुझे परम अधिकारी जानकर—
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।
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लोमशजी से शाप और अनुग्रह