तब मैं कहा कृपानिधि तुम्ह सर्बग्य

दोहा ११० (घ) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

तब मैं कहा कृपानिधि तुम्ह सर्बग्य सुजान। सगुन ब्रह्म अवराधन मोहि कहहु भगवान॥ ११० (घ) ॥

अर्थ

तब मैंने कहा—हे कृपानिधि! आप सर्वज्ञ हैं और सुजान हैं। हे भगवन्‌! मुझे सगुण ब्रह्म की आराधना [की प्रक्रिया] कहिये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का दोहा ११० (घ) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।

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लोमशजी से शाप और अनुग्रह