तब मुनि कहेउ सुमंत्र सन सुनत
तब मुनि कहेउ सुमंत्र सन सुनत
दोहा १० (क) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
तब मुनि कहेउ सुमंत्र सन सुनत चलेउ हरषाइ। रथ अनेक बहु बाजि गज तुरत सँवारे जाइ॥ १० (क) ॥
अर्थ
तब मुनि ने सुमन्त्र जी से कहा, वे सुनते ही हर्षित होकर चले। उन्होंने तुरंत ही जाकर अनेकों रथ, घोड़े और हाथी सजाये।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का दोहा १० (क) है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप