तब बिग्यानरूपिनी बुद्धि बिसद घृत पाइ

दोहा ११७ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

तब बिग्यानरूपिनी बुद्धि बिसद घृत पाइ। चित्त दिआ भरि धरै दृढ़ समता दिअटि बनाइ॥ ११७ (ख) ॥

अर्थ

तब विज्ञानरूपिणी बुद्धि उस [ज्ञानरूपी] निर्मल घी को पाकर उससे चित्तरूपी दीये को भरकर, समता की दीवट बनाकर, उस पर उसे दृढ़तापूर्वक (जमाकर) रखे।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का दोहा ११७ (ख) है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।

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ज्ञान और भक्ति की महिमा