सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ
सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ
दोहा १०१ (क) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ द्वेष पाषंड। मान मोह मारादि मद ब्यापि रहे ब्रह्मंड॥ १०१ (क) ॥
अर्थ
सुनो, पक्षिराज! कलियुग में कपट, हठ, दंभ, द्वेष, पाखण्ड, मान, मोह, मार आदि मद ब्रह्माण्ड भर में व्याप्त हो गये हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का दोहा १०१ (क) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा