सुनु खगपति यह कथा पावनी

चौपाई १, दोहा १५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनु खगपति यह कथा पावनी। त्रिबिध ताप भव भय दावनी॥ महाराज कर सुभ अभिषेका। सुनत लहहिं नर बिरति बिबेका॥ १ ॥

अर्थ

हे गरुड़जी! सुनिये, यह कथा [सबको] पवित्र करनेवाली है, [दैहिक, दैविक, भौतिक] तीनों प्रकार के तापों और जन्म-मृत्यु के भय का नाश करनेवाली है। महाराज श्रीरामचन्द्रजी के कल्याणमय राज्याभिषेक का चरित्र [निष्कामभाव से] सुनकर मनुष्य वैराग्य और ज्ञान प्राप्त करते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम राज्याभिषेक और स्तुति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के दिव्य राज्याभिषेक और वेद तथा शिवजी द्वारा प्रभु की स्तुति का वर्णन है।

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राम राज्याभिषेक और स्तुति