सुनिअ तहाँ हरिकथा सुहाई
सुनिअ तहाँ हरिकथा सुहाई
चौपाई ३, दोहा ६१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनिअ तहाँ हरिकथा सुहाई। नाना भाँति मुनिन्ह जो गाई॥ जेहि महुँ आदि मध्य अवसाना। प्रभु प्रतिपाद्य राम भगवाना॥ ३ ॥
अर्थ
और वहाँ (सत्संग में) सुन्दर हरिकथा सुनी जाय, जिसे मुनियों ने अनेकों प्रकार से गाया है और जिसके आदि, मध्य और अन्त में भगवान् श्रीरामचन्द्रजी ही प्रतिपाद्य प्रभु हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा