सुनि बिनती सर्बग्य सिव देखि बिप्र

दोहा १०८ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

सुनि बिनती सर्बग्य सिव देखि बिप्र अनुरागु। पुनि मंदिर नभबानी भइ द्विजबर बर मागु॥ १०८ (क) ॥

अर्थ

सर्वज्ञ शिवजी ने विनती सुनी और ब्राह्मण का प्रेम देखा। तब मन्दिर में आकाशवाणी हुई कि हे द्विजश्रेष्ठ, वर माँगो।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह” प्रकरण का दोहा १०८ (क) है। इस प्रकरण में गुरु की क्षमायाचना, शाप के अनुग्रह में परिणत होने और काकभुशुण्डि की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है।

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गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह