रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये
श्लोक ९, दोहा १०८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
श्लोक पाठ
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये। ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति॥ ९ ॥
अर्थ
भगवान् रुद्र की स्तुति का यह अष्टक उन शम्भुजी की तुष्टि के लिये ब्राह्मण द्वारा कहा गया। जो मनुष्य इसे भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर भगवान् शम्भु प्रसन्न होते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह” प्रकरण का श्लोक ९, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु की क्षमायाचना, शाप के अनुग्रह में परिणत होने और काकभुशुण्डि की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है।
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गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह