सुंदर सुजान कृपा निधान अनाथ पर
सुंदर सुजान कृपा निधान अनाथ पर
छन्द ३, दोहा १३० के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
छन्द पाठ
सुंदर सुजान कृपा निधान अनाथ पर कर प्रीति जो। सो एक राम अकाम हित निर्बानप्रद सम आन को॥ जाकी कृपा लवलेस ते मतिमंद तुलसीदासहूँ। पायो परम बिश्रामु राम समान प्रभु नाहीं कहूँ॥ ३ ॥
अर्थ
सुन्दर, सुजान और कृपानिधान तथा जो अनाथों पर प्रेम करते हैं, ऐसे एक श्रीरामचन्द्रजी ही हैं। इनके समान निष्काम (निःस्वार्थ) हित करनेवाला और मोक्ष देनेवाला दूसरा कौन है? जिनकी लेशमात्र कृपा से मन्दबुद्धि तुलसीदास ने भी परम शान्ति प्राप्त कर ली, उन श्रीरामजी के समान प्रभु कहीं भी नहीं हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का छन्द ३, दोहा १३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।
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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति