सुनतेउँ किमि हरि कथा सुहाई

चौपाई ३, दोहा ६९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनतेउँ किमि हरि कथा सुहाई। अति बिचित्र बहु बिधि तुम्ह गाई॥ निगमागम पुरान मत एहा। कहहिं सिद्ध मुनि नहिं संदेहा॥ ३ ॥

अर्थ

और कैसे अत्यन्त विचित्र यह सुन्दर हरिकथा सुनता; जो आपने बहुत प्रकार से गायी है ? वेद, शास्त्र और पुराणों का यही मत है; सिद्ध और मुनि भी यही कहते हैं, इसमें सन्देह नहीं कि--।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा