संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही

चौपाई ४, दोहा ६९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही। चितवहिं राम कृपा करि जेही॥ राम कृपाँ तव दरसन भयऊ। तव प्रसाद सब संसय गयऊ॥ ४ ॥

अर्थ

शुद्ध (सच्चे) संत उसी को मिलते हैं जिसे श्रीरामजी कृपा करके देखते हैं। श्रीरामजी की कृपा से मुझे आपके दर्शन हुए और आपकी कृपा से मेरा सन्देह चला गया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा