सुनहु राम कर सहज सुभाऊ

चौपाई ३, दोहा ७४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनहु राम कर सहज सुभाऊ। जन अभिमान न राखहिं काऊ॥ संसृत मूल सूलप्रद नाना। सकल सोक दायक अभिमाना॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी का सहज स्वभाव सुनिये। वे जन में अभिमान कभी नहीं रहने देते। क्योंकि अभिमान जन्म-मरणरूप संसार का मूल है और अनेक प्रकार के क्लेशों तथा समस्त शोकों का देने वाला है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा