राम कृपा भाजन तुम्ह ताता

चौपाई २, दोहा ७४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

राम कृपा भाजन तुम्ह ताता। हरि गुन प्रीति मोहि सुखदाता॥ ताते नहिं कछु तुम्हहि दुरावउँ। परम रहस्य मनोहर गावउँ॥ २ ॥

अर्थ

हे तात! आप श्रीरामजी के कृपापात्र हैं। श्रीहरि के गुणों में आपकी प्रीति है, इसीलिये आप मुझे सुख देने वाले हैं। इसी से मैं आपसे कुछ भी नहीं छिपाता और अत्यन्त रहस्य की बातें आपको गाकर सुनाता हूँ।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा