सुमिरि राम के गुन गन नाना

चौपाई १, दोहा १२४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुमिरि राम के गुन गन नाना। पुनि पुनि हरष भुसुंडि सुजाना॥ महिमा निगम नेति करि गाई। अतुलित बल प्रताप प्रभुताई॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के बहुत-से गुणसमूहों का स्मरण कर-करके सुजान भुशुण्डिजी बार-बार हर्षित हो रहे हैं। जिनकी महिमा वेदों ने 'नेति-नेति' कहकर गायी है; जिनका बल, प्रताप और प्रभुत्व (सामर्थ्य) अतुलनीय है;।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।

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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति