सासुन्ह सादर जानकिहि मज्जन तुरत कराइ
सासुन्ह सादर जानकिहि मज्जन तुरत कराइ
दोहा ११ (क) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
सासुन्ह सादर जानकिहि मज्जन तुरत कराइ। दिब्य बसन बर भूषन अँग अँग सजे बनाइ॥ ११ (क) ॥
अर्थ
[इधर] सासुओं ने जानकीजी को आदर के साथ तुरंत ही स्नान कराकर उनके अंग-अंग में दिव्य वस्त्र और श्रेष्ठ आभूषण भलीभाँति सजा दिये (पहना दिये)।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का दोहा ११ (क) है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप