सासुन्ह सबनि मिली बैदेही
सासुन्ह सबनि मिली बैदेही
चौपाई १, दोहा ७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सासुन्ह सबनि मिली बैदेही। चरनन्हि लागि हरषु अति तेही॥ देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता॥ १ ॥
अर्थ
जानकीजी सब सासुओं से मिलीं और उनके चरणों में लगकर उन्हें अत्यन्त हर्ष हुआ। सासुएँ कुशल पूछकर आशीष दे रही हैं कि तुम्हारा सुहाग अचल हो।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप