संत संग अपबर्ग कर कामी भव
संत संग अपबर्ग कर कामी भव
दोहा ३३ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
संत संग अपबर्ग कर कामी भव कर पंथ। कहहिं संत कबि कोबिद श्रुति पुरान सदग्रंथ॥ ३३ ॥
अर्थ
संत का संग मोक्ष (भव-बन्धन से छूटने) का और कामी का संग जन्म-मृत्यु के बन्धन में पड़ने का मार्ग है। संत, कवि और कोविद तथा श्रुति, पुराण [आदि] सद्ग्रन्थ ऐसा कहते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का दोहा ३३ है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।
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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन