संकर दीनदयाल अब एहि पर होहु

दोहा १०८ (घ) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

संकर दीनदयाल अब एहि पर होहु कृपाल। साप अनुग्रह होइ जेहिं नाथ थोरेहीं काल॥ १०८ (घ) ॥

अर्थ

हे दीनों पर दया करनेवाले [कल्याणकारी] शंकर! अब इस पर कृपालु होइये (कृपा कीजिये), जिससे हे नाथ! थोड़े ही समय में इस पर शाप के बाद अनुग्रह (शाप से मुक्ति) हो जाय।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह” प्रकरण का दोहा १०८ (घ) है। इस प्रकरण में गुरु की क्षमायाचना, शाप के अनुग्रह में परिणत होने और काकभुशुण्डि की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है।

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गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह