रिपु रन जीति सुजस सुर गावत
रिपु रन जीति सुजस सुर गावत
चौपाई ३, दोहा २ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
रिपु रन जीति सुजस सुर गावत। सीता सहित अनुज प्रभु आवत॥ सुनत बचन बिसरे सब दूखा। तृषावंत जिमि पाइ पियूषा॥ ३ ॥
अर्थ
शत्रु को रण में जीतकर सीताजी और लक्ष्मणजी सहित प्रभु आ रहे हैं; देवता उनका सुन्दर यश गा रहे हैं। ये वचन सुनते ही [भरतजी को] सारे दुःख भूल गये। जैसे प्यासा आदमी अमृत पाकर प्यास के दुःख को भूल जाय।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत विरह, हनुमान आगमन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत के विरह, हनुमान के शुभ आगमन और अयोध्या में हर्ष का वर्णन है।
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भरत विरह, हनुमान आगमन