रिद्धि सिद्धि प्रेरइ बहु भाई

चौपाई ४, दोहा ११८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

रिद्धि सिद्धि प्रेरइ बहु भाई। बुद्धिहि लोभ दिखावहिं आई॥ कल बल छल करि जाहिं समीपा। अंचल बात बुझावहिं दीपा॥ ४ ॥

अर्थ

हे भाई! वह बहुत-सी ऋद्धि-सिद्धियों को भेजती है, जो आकर बुद्धि को लोभ दिखाती हैं। और वे कल, बल और छल करके समीप जाती हैं और आँचल की वायु से उस दीपक को बुझा देती हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “ज्ञान और भक्ति की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ज्ञान, भक्ति और ज्ञानदीपक के प्रतीक द्वारा भक्ति की सहज महिमा का वर्णन है।

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ज्ञान और भक्ति की महिमा