राम करहिं भ्रातन्ह पर प्रीती
राम करहिं भ्रातन्ह पर प्रीती
चौपाई २, दोहा २५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
राम करहिं भ्रातन्ह पर प्रीती। नाना भाँति सिखावहिं नीती॥ हरषित रहहिं नगर के लोगा। करहिं सकल सुर दुर्लभ भोगा॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी भी भाइयों पर प्रेम करते हैं और उन्हें नाना प्रकार की नीतियाँ सिखलाते हैं। नगर के लोग हर्षित रहते हैं और सब प्रकार के देवदुर्लभ (देवताओं को भी कठिनता से प्राप्त होने योग्य) भोग भोगते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
रामराज्य का वर्णन