अहनिसि बिधिहि मनावत रहहीं

चौपाई ३, दोहा २५ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

अहनिसि बिधिहि मनावत रहहीं। श्रीरघुबीर चरन रति चहहीं॥ दुइ सुत सुंदर सीताँ जाए। लव कुस बेद पुरानन्ह गाए॥ ३ ॥

अर्थ

वे दिन-रात ब्रह्माजी को मनाते रहते हैं और [उनसे] श्रीरघुवीर के चरणों में प्रीति चाहते हैं। सीताजी ने दो सुन्दर पुत्र उत्पन्न किए, लव और कुश, जिनका वर्णन वेद-पुराणों ने किया है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन