राम अनंत अनंत गुनानी
राम अनंत अनंत गुनानी
चौपाई २, दोहा ५२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
राम अनंत अनंत गुनानी। जन्म कर्म अनंत नामानी॥ जल सीकर महि रज गनि जाहीं। रघुपति चरित न बरनि सिराहीं॥ २ ॥
अर्थ
भगवान् श्रीराम अनन्त हैं; उनके गुण अनन्त हैं; जन्म, कर्म और नाम भी अनन्त हैं। जल की बूँदें और पृथ्वी के रज-कण चाहे गिने जा सकते हों, पर श्रीरघुनाथजी के चरित्र का वर्णन नहीं किया जा सकता।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा