पुर सोभा कछु बरनि न जाई

चौपाई ४, दोहा २९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

पुर सोभा कछु बरनि न जाई। बाहेर नगर परम रुचिराई॥ देखत पुरी अखिल अघ भागा। बन उपबन बापिका तड़ागा॥ ४ ॥

अर्थ

नगर की शोभा तो कुछ कही नहीं जाती। नगर के बाहर भी परम सुन्दरता है। श्री अयोध्या पुरी के दर्शन करते ही सम्पूर्ण पाप भाग जाते हैं। [वहाँ] वन, उपवन, बावलियाँ और तालाब सुशोभित हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चारों भाइयों के पुत्रजन्म, अयोध्या की शोभा और सनकादि मुनियों के श्रीराम से परम तत्त्व संवाद का वर्णन है।

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पुत्रजन्म, सनकादि का आगमन